कतय छै सहिद ? श्यामसुन्दर यादव

आजादीक खातिर जे जानक आहुति द गेल
छातिमे गोली वरण करैत जे हँसैत रहि गेल
सदति ओ मुक्ति, मुक्ति रट लगवैत रहि गेल
न्याय, समानता आ सुशासन खोजैत रहि गेल
हे हौ भाइ तोही कह, एखन कत छै ओ सहिद ?

Shyam Sundar Yadav
मातृभूमीक कसम खा, ओ सदति लडैत रहि गेल
गुजगुज अन्हरियाक तड्कामे ओ घर छोडि गेल
दुश्मनसँ लडए जा रहल छी, बस एतबा कहि गेल
आँधी, तुफान आ चट्टानसँ टकराइत रहि गेल
हे हौ भाइ तोही कह, एखन कत छै ओ सहिद ?

बेटाक लेल राखल सनेश पौँतियेमे साँठले रहि गेल
मुनियाँ बहिनक राखी, थारीमे ओहिना सजले रहि गेल
खुशीक सपना सभटा बाबुजीक बटुवामे कसले रहि गेल
अगिला सालक रंग अबिरक होरी, अतित बनिके रहि गेल
हे हौ भाइ तोही कह, एखन कत छै ओ सहिद ?

अप्पन सोनितसँ स्वतन्त्रताक ईतिहास रचैत रहि गेल
मायक ममताक आँचर सोनितसँ भिजते रहि गेल
बचपनके टोनाटोनी, रुसाफूली, नुका चोरी अतित बनि गेल
भविष्यक सपना सारा, कोशी कमला बनि नोरमे बहि गेल
हे हौ भाइ तोही कह, एखन कत छै ओ सहिद ?

सहिदक बलिदानी, निलामीक व्यापार होइते रहि गेल
मुक्तिक उत्कट पियास लए, मरुभूमीमे तडपैत रहि गेल
सत्ता भत्ताक खरिद बिक्री आ दाउ पेंच होइते रहि गेल
जाली फट्हा आ शोषकके बाउग बुबुआइते रहि गेल
हे हौ भाइ तोही कह, एखन कत छै ओ सहिद ?

पैरबी पट्टाक बलपर सहिदक सूची बढिते रहि गेल
दिनोदिन सहिदक घोषणा क्रमशः होइते रहि गेल
कथित सहिद बनए, झूठमूठक नौटंकी सेहो होइते रहि गेल
खुनक धार आ बलिदानी कथी लए सवाल उठिते रहि गेल
हे हौ भाइ तोही कह, एखन कत छै ओ सहिद ?