कामना अहिँक लेल – श्यामसुन्दर यादव

काल्हि धरि जे अप्पन छल
आइ ओ बिरान भ गेल ।
जीनगीक सभटा सपना
सपने बनि रहि गेल । ।
छल जीनगी अहिंक लेल
किया बिरान बनि गेल ।
खुशी सभटा अहि छलौ
किया नयन नोर भरि गेल ।।
बिश्वासक अटुट ताग
आइ किये टुटि गेल ।
आँखिक दिव्य ज्योति
के लुटिके ल गेल ।।
बाटक बटोहीके उडान
आइ किया ठमकि गेल ।
जारी अछि पथिकक यात्रा
सहयात्री किया छुटि गेल । ।
फूसियोक ओ झग्गड
महाभारत बनि गेल ।
सुख–दुःख बँटैत छलौ
आइ कतए हरा गेल ।।
सदिखन जे पोछैत छल नोर
मुदा आइ कत हरा गेल ।
लागल चोट एहन
कलेजा दू टुक भ गेल ।।
जानि नहि पएलौं हम
भूल कतए भ गेल ।
सोचि नहि पएलौं
नहि जानि की भ गेल ।।
नजरि लागल केकर
ई की भ गेल ।
समर्पण सभटा हमर
बेकार किया बनि गेल ।।
मोन दिल अहाँक
किया रंग फेर गेल ।
त्याग समर्पणके लतियाबैत
नजानि ओ की क गेल ।।
बाट जोहैत रहलौं हम
ओ लतियाबैत चलि गेल ।
सभटा बात अहाकेँ
बुझाएल नेनाक खेल । ।
भेटल हमरा मृत्यू दण्ड
ओ हँसैत चलि गेल ।
भेटल अहाँक आजादी
हमरा सदाक लेल जेल ।।
जीवनक नवरंग मिलैत रहए
खेलैत रहु खुशीक खेल ।
होइत रहए जीत अहाँके
कामना अहिक लेल ।।