बाल गजल -कुन्दन कुमार कर्ण

फूल पर बैस खेलै छै तितली
डारि पर खूब कूदै छै तितली
Kundan
भोर आ साँझ नित दिन बारीमे
गीत गाबैत आबैछैतितली

लाल हरिअर अनेको रंगक सभ
देखमे नीक लागै छै तितली

पाँखिफहराक देखू जे उडि-उडि
दूर हमरासँ भागै छै तितली

नाचबै हमहुँ यौ कुन्दन भैया
आब जेनाक नाचै छै तितली