मधेशी नेतृत्व और पत्रकार से अपील : सुजित कुमार ठाकुर

सितम्बर १८ ,२०१४ को डॉ सी के राउत को मोरंग पुलिस ने तत्कालीन गृहमंत्री और कुछ तथाकथित मधेशी नेताओं के साझा षड़यंत्र के वजह से गिरफ्तार किया था | सारे षड्यंत्रकारियों का उद्देश्य था की सी के राउत को गिरफ्तार कर लेने से उन के चलती हुई दुकानदारी को होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता हैं | लेकिन हुआ उल्टा , लोगों में सी के राउत के प्रति लगाव बढ़ने लगा , स्वतंत्र मधेश के पक्ष में हवा बनने लगी | जहाँ लोग हम मधेशी हैं कहने से घबराते थे , वहां खुल्लम खुल्ला सभाए होने लगी , लोगों ने आज़ादी के लिए खुल के नारे लगाना शुरू किया | मधेश में इस प्रवृति के विकास के कई कारन हैं , एक पहला जो सब से प्रबल कारन हैं वह हैं मधेशीयों के ऊपर लादी गई उपनिवेशी सत्ता , दूसरा अधिकारों के मांग करने पर मधेशीयों के ऊपर का दमन | इन सब के बीच सी के राउत के ऊपर किया गया अमानवीय व्यबहार मधेशीयों के सोई हुई आत्मसम्मान को जगाने का काम किया | सोचने वाली बात हैं की एक विद्वान मधेशी , जिस की विद्वता की कदर दुनिया में हर जगह हो , उस ने शांतिपूर्वक अपनी बात रखनी चाही तो किस निर्ममता से उस के ऊपर आक्रमण हुआ | वर्तमान नेपाल में ऐसे कई नेपाली नेता हैं जो की हिस्टरीशीटर हैं , लेकिन खुलेआम घूम रहे हैं , सारी सुख सुविधा का उपभोग कर रहे हैं लेकिन एक मधेशी वैज्ञानिक को अपनी बात रखने तक का छूट नहीं दिया जाता हैं , इस से मधेशी जनता में निराशा का प्रवाह हुआ , इस से मधेशीयों का दशको से दबा हुआ आत्मसम्मान ऊपर आया और तब दलाल प्रवृति के मधेशी नेता एवं निरंकुश प्रवृति के नेपाली नेता को एकाएक अपनी चाल उलटी परती हुई दिखाई दी | दलाल प्रवृति के मधेशी नेता जो की मधेशी के नाम पर दुकान चलाने में लगें हुए हैं , उन के निचे का जमीं सरकता हुआ मह्शूश हुआ वही जो अबतक मधेशी को दबा के साशन करते आये नेपालियों को अब अपनी किस्मत अंधकार के तरफ बढ़ता हुआ मह्शूश हुआ |
अब बौखलाहट में ऐसे मधेशी नेता एवं उन के भक्त पत्रकार गण लगें सी के राउत को गलियाने , कुछ तो उन के पहनाबे को आधार बना के अपनी सारी ऊर्जा खर्च कर के लेख लिखने लगें | सी के राउत क्या पहनते हैं वह मुद्दा नहीं हैं यहाँ फिर भी सी के राउत के साथ कुछ समय सहकार्य करने के आधार पर मैं यह कह सकता हूँ की सी के राउत ने मधेशी पहचान , मधेशी संस्कार को हमेशा सम्मान किया हैं , और उन के सूट या टाई पहनने को ले ले सशंकित लोगों को यह बताना जरुरी हैं की जिन आकाओं द्वारा वे संचालित हैं उन से जा के पूछे की सत्ता सुख में रहने के बाद क्या किया मधेशी पहचान एवं संस्कार के प्रबर्धन के लिए ?
हम ने बहुत जगह पर देखा हैं मधेशी नेताओं को अपना पीठ ठोकते हुए की हमारी योगदान को भुलाया नहीं जा सकता , किस योगदान की बात करते हैं ये ?? ६० से अधिक को निर्दई सत्ता के द्वारा हत्या करबा के क्या पा लिया आप ने ??कुर्सी , पैसा ?? अपने बच्चो के लिए कीमती स्कूल , छात्रवृति , बड़ा घर , भारतीय दूतावास की चाकरी ?? और कुछ ?? और आप के दलाल पत्रकार बंधू लगें हैं आप के प्रशंशा में कशीदा पढ़ने में | सी के राउत को विदेशी के द्वारा संचालित कह के लोगों में एक प्रकार के दुस्प्रचार फ़ैलाने में | एक बात तो तय है की डॉ सी के राउत ने पिछले ५-६ साल में जो कर दिया हैं , वर्तमान मधेशी नेता सब मिल के भी अपने पुरे राजनैतिक जीवन में उस का १० % भी नहीं कर पाएं हैं | फिर भी डॉ राउत ने कभी किसी मधेशी नेता का आलोचना नहीं किया , हम ने हमेशा मधेशी नेतृत्व को अपना सहयोगी माना हैं , चाहे जितना भी किया हैं उन के योगदान का भी हम सम्मान करते हैं , कृपया आप लोग इस तरह के सस्ता क्रियाकलाप को रोकें और अबतक जो नहीं किया वह करें , मधेश हित में कुछ करें |
सी के राउत को २३ अप्रैल को छोड़ा गया , हो सकता हैं उस के पीछे नेपाली सत्ता का कोई चाल हो लेकिन फिलहाल तो एक बात तय हैं की १८ सितम्बर से ले के अबतक नेपाली सत्ता के द्वारा किये गए काम को अदालत ने गलत साबित कर दिया और इस बीच में सत्ता के मद में या सत्ता पाने के लोभ भी जिस मधेशी नेता ने डॉ राउत के काम को गाली देना अपना राष्ट्रिय धर्म माना , उन सब को बेबकूफ साबित कर दिया अदालत ने | अभी के लिए इतना ही |