रङ्ग–उमङ्गक साँस्कृतिक पर्व फगुआ

श्यामसुन्दर यादव ‘पथिक’:   होरी अर्थात फगुआ रंगक त्यौहार थिक । मिथिलाञ्चलमे अहि पर्वके मिथिला बासीसभद्धारा रंगोत्सवके रुपमे मनाओल जाईत छैक । होरी अर्थात फगुवा पावनिके लग सऽ देखल जाई तऽ प्रेम, सदभाव आ भाईचाराक सम्बन्ध विस्तार करवला पर्व थिक । जाड सँ उन्मुक्ति पावि वसन्त ऋतु फागुण पुर्णिमाके दिन मनाओल … more

सुन गै बुधनी – श्यामसुन्दर यादव

अंग अंग तोहर सुन्दरता सँ भरल मदमस्त जवानी छौ चढल रुपक जादुस सुगन्धित पवन बिजली गिरवै छौ, तोहर नयन सुन गै बुधनी तोरे कहै छियौ…… संस्कृति आ संस्कार बदलैत जाइछौं अप्पन पहिरण पर सुटबुट चढल जाइछौं लाज शरमकेर पर्दा खुजैत जाइछौं मुँहस मिथिलाकेर मिश्री बोल बदलल जाइछौ सुन गै बुधनी … more

बाल गजल -कुन्दन कुमार कर्ण

फूल पर बैस खेलै छै तितली डारि पर खूब कूदै छै तितली भोर आ साँझ नित दिन बारीमे गीत गाबैत आबैछैतितली लाल हरिअर अनेको रंगक सभ देखमे नीक लागै छै तितली पाँखिफहराक देखू जे उडि-उडि दूर हमरासँ भागै छै तितली नाचबै हमहुँ यौ कुन्दन भैया आब जेनाक नाचै छै तितली … more

कामना अहिँक लेल – श्यामसुन्दर यादव

काल्हि धरि जे अप्पन छल आइ ओ बिरान भ गेल । जीनगीक सभटा सपना सपने बनि रहि गेल । । छल जीनगी अहिंक लेल किया बिरान बनि गेल । खुशी सभटा अहि छलौ किया नयन नोर भरि गेल ।। बिश्वासक अटुट ताग आइ किये टुटि गेल । आँखिक दिव्य ज्योति … more

कतय छै सहिद ? श्यामसुन्दर यादव

आजादीक खातिर जे जानक आहुति द गेल छातिमे गोली वरण करैत जे हँसैत रहि गेल सदति ओ मुक्ति, मुक्ति रट लगवैत रहि गेल न्याय, समानता आ सुशासन खोजैत रहि गेल हे हौ भाइ तोही कह, एखन कत छै ओ सहिद ? मातृभूमीक कसम खा, ओ सदति लडैत रहि गेल गुजगुज … more

अपन ह्रदय के आकश बनाऊ – पंकज झा

बंद  करू, एक  दोसर के, प्रताड़ित   करव, अपन  अहँकार  स, एक  दोसर के झरकैब, याद  राखु, अंततः अहाँ, स्वयं के  दुखी करैत  छी, कोणठा  मेंनुका-नुका कनै छी, मरल  मूस  के कतवो  झापव, दुर्गध घेरवे टा  करत, ओही  स्मृति  पर  नै  इतराउ, जे  अहाँ  क खुशी के  ग्रसने अई, “बिसरू” … more