सुन गै बुधनी – श्यामसुन्दर यादव

अंग अंग तोहर सुन्दरता सँ भरल
मदमस्त जवानी छौ चढल
रुपक जादुस सुगन्धित पवन
बिजली गिरवै छौ, तोहर नयन
सुन गै बुधनी तोरे कहै छियौ……

Shyam Sundar Yadav

Shyam Sundar Yadav

संस्कृति आ संस्कार बदलैत जाइछौं
अप्पन पहिरण पर सुटबुट चढल जाइछौं
लाज शरमकेर पर्दा खुजैत जाइछौं
मुँहस मिथिलाकेर मिश्री बोल बदलल जाइछौ
सुन गै बुधनी तोरे कहै छियों ………….

बाबु माय भैया छोडि डैड, मम ब्रो कहै छै
साइकिलक कि बात ? मोटर मारुती चढै छे
गै मस्का–मस्कीके जवानीके शान बुझै छे
चलैत बाट हँसी ठहाँका आ खुब हिंहियाइ छे
सुन गे बुधनी तोरे कहै छियौ …………….

अतित तोरा बेमतलवी बकबास बुझाई छौ
डलरक नशामे इमान तोहर लिलाम भेल जाइछौ
नाता–सम्बन्धक नामपर कुकृत्य बढल जाइछौ
चहुँदिस दुर–दुर छियाके पदवीक ढेरी लागत जाइछौ
सुन गै बुधनी तोरे कहै छियौं ……………

गै कतए बन्धकी राखले अपप्न संस्कृतिके
अप्पन चालि छोडि  खजन चिडई चालि चलै छे
गै रोजे रोज संगी बनवैत आ छोडैत जाई छे
हुस्नक नशामे जिस्मक खरिद–बिक्री ब्यापार करै छे
सुन गै बुधनी तोरे कहै छियौं ……………

पूmलमे भँवरा ओहिना लोभेबे करैत छैक
रंगीन दुनियाँ हसीन त बुझेवे करैत छैक
एहेनमे त गलत डेग सहिये बुझाईत छैक
टाकाक पाँछा त नैतिकता सेहो खाक बुझाईत छैक
सुन गै बुधनी तोरे कहै छियौं …………………

गै सुगन्ध बिनु फूलकेर महत्व कि ?
संस्कृति–सभ्यता विहिन ओ मानव कि ?
लाज आ संस्कार विहिन नारीक पहिचान कि ?
गै परदा बिनु ओ घरक श्रृंगार कि ?
सुन गै बुधनी तोरे कहै छियौं ……………

सोच एक बेरी जनक आ सुनयनाक बेटी
गै आबो स्वाभिमानक बात सोच कि कहियो बेसी
क्षणिक सुखक हिसाब–किताब करए परतौ भुक्तानी
दिन एहेन एतौ केओ नहि सुनतौ तोहर कहानी
सुन गै बुधनी तोरे कहै छियौं