कामना अहिँक लेल – श्यामसुन्दर यादव

काल्हि धरि जे अप्पन छल आइ ओ बिरान भ गेल । जीनगीक सभटा सपना सपने बनि रहि गेल । । छल जीनगी अहिंक लेल किया बिरान बनि गेल । खुशी सभटा अहि छलौ किया नयन नोर भरि गेल ।। बिश्वासक अटुट ताग आइ किये टुटि गेल । आँखिक दिव्य ज्योति … more

कतय छै सहिद ? श्यामसुन्दर यादव

आजादीक खातिर जे जानक आहुति द गेल छातिमे गोली वरण करैत जे हँसैत रहि गेल सदति ओ मुक्ति, मुक्ति रट लगवैत रहि गेल न्याय, समानता आ सुशासन खोजैत रहि गेल हे हौ भाइ तोही कह, एखन कत छै ओ सहिद ? मातृभूमीक कसम खा, ओ सदति लडैत रहि गेल गुजगुज … more