कामना अहिँक लेल – श्यामसुन्दर यादव

काल्हि धरि जे अप्पन छल आइ ओ बिरान भ गेल । जीनगीक सभटा सपना सपने बनि रहि गेल । । छल जीनगी अहिंक लेल किया बिरान बनि गेल । खुशी सभटा अहि छलौ किया नयन नोर भरि गेल ।। बिश्वासक अटुट ताग आइ किये टुटि गेल । आँखिक दिव्य ज्योति … more

ये मेरे दोस्त मेरे खामोसी को मेरी कमजोरी मत सम्झना! – लभ कुमार यादव

ये मेरे दोस्त मेरे खामोसी को मेरी कमजोरी मत सम्झना! अवाज तो मै पहले भी उठा सकता था तेरी बुरी कर्तुतो पे!! ये मत सम्झना कि हम तेरी इन कर्तुतो से परिचित नही थे!!! लेकिन मैने तुम्हे अपना समझ के गल्ती पे गल्ती करता रहा!! और आज जब हमे यह … more

कतय छै सहिद ? श्यामसुन्दर यादव

आजादीक खातिर जे जानक आहुति द गेल छातिमे गोली वरण करैत जे हँसैत रहि गेल सदति ओ मुक्ति, मुक्ति रट लगवैत रहि गेल न्याय, समानता आ सुशासन खोजैत रहि गेल हे हौ भाइ तोही कह, एखन कत छै ओ सहिद ? मातृभूमीक कसम खा, ओ सदति लडैत रहि गेल गुजगुज … more

अपन ह्रदय के आकश बनाऊ – पंकज झा

बंद  करू, एक  दोसर के, प्रताड़ित   करव, अपन  अहँकार  स, एक  दोसर के झरकैब, याद  राखु, अंततः अहाँ, स्वयं के  दुखी करैत  छी, कोणठा  मेंनुका-नुका कनै छी, मरल  मूस  के कतवो  झापव, दुर्गध घेरवे टा  करत, ओही  स्मृति  पर  नै  इतराउ, जे  अहाँ  क खुशी के  ग्रसने अई, “बिसरू” … more